This blog is created only for promoting Renaissance Movement in India, so that the struggle for removing Caste-Class system can take motion.

तात्यासाहब महात्मा जोतीराव फुले जी के स्मृतीदिन के पूर्वसंध्या के दिन (27 नवंबर 2016) उनके राष्ट्रीय स्मारक (फुलेवाडा) पर ‘’दिपउत्सव’’ मनाया गया। राष्ट्रीय स्मारक हजारो दिप से चमक उठा। उसके पहले क्रांतीज्योती सावित्रीमाई फुले सभागृह मे ‘जोती अस्थिवंदना’ प्रोग्राम संपन्न हुआ। प्रोफेसर श्रावण देवरे अध्यक्ष थे। विधान परिषद सदस्य (आमदार) श्रीमती दिप्ती चौधरी, एक्स एमएलए कमल ढोलेपाटील, रतनलाल सोनाग्रा चिफगेस्ट थे। इस समयपर 5 मान्यवरोंको गौरव-पत्र देकर सम्मानित किया गया। आंतरराष्ट्रीय सत्यशोधक मुव्हमेंट के संस्थापक सुनिल सरदार, डॉ. प्रोफेसर वंदना महाजन, ऍड. बोरुडे, संध्या ढाकूलकर और विकास आबनाबे इनको सम्मनित किया गया। अपने अध्यक्षीय भाषन मे श्रावण देवरे ने तात्यासाहब महात्मा जोतीराव फुले और क्रांतीज्योती सावित्रीमाई के कार्य और विचार को आज के संदर्भ मे भी क्रांतीकारी बताया। माली समाज प्रबोधिनी के संस्थापक दशरथ कूलधरन जी ने प्रोग्राम को आयोजित किया था।
No comments:
Post a Comment